सूखा रोग

सूखा रोग (रिकेट्स) हड्डियों का रोग है जो बच्चों प्राय: बच्चों में होता है। बच्चों में हड्डियों की नरमाई या कमजोर होने को सूखा रोग कहते हैं। परिणामस्वरूप अस्थिविकार होकर पैरों का टेढ़ापन और मेरूदंड में असामान्य मोड आ जाते हैं। इसी प्रकार की विकृति को बड़ों में ऑस्टिमैल्सिया कहा जाता है।

सूखा रोग
वर्गीकरण व बाहरी संसाधन
आईसीडी-१० E55.
आईसीडी- 268
रोग डाटाबेस 9351
मेडलाइन+ 000344
ई-मेडिसिन ped/2014 
MeSH D012279

लक्षण

लक्षण और चिह्न प्रकट होने के कुछ महिनों पहले से विटामिन डी की कमी होने लगती है। जब इसके लक्षण प्रकट होते हैं तब वे इस प्रकार हो सकते हैं -

  • कंकाल विकृति - पैरों का टेढ़ा होना, मेरुदण्ड का असामान्य टेढ़ा होना, पेडू की असमान्यता और छाती की छड्डियों का बाहर आना होता है।
  • अस्थि भंगुरता - सूखा रोग में बच्चों की हड्डी टूटने की भय रहता है।
  • विकास में बाधा - सूखा रोग के कारण लम्बाई देर से होती है।
  • दाँतों की समस्या - इनमें दाँतों की रचना में विकृति, दाँतों में कैविटी होना, दंतवल्क की कमी और दाँतों में देर से विकास होना सम्मिलित हैं।
  • हड्डियों का दर्द - धीमा, मध्यम दर्द या मेरूदण्ड, कूल्हे और पैरों में होता है।
  • पेशियों में कमजोरी - पेशीय शक्ति की कमी के कारण गति में बाधा होती है।

कारण

प्रायः इसका कारण लम्बे समय तक विटामिन डी की कमी होता है। आहारनली से कैल्शियम और फास्फोरस के शोषण में सहायता के लिए पोषक घ जरूरी है। बच्चों की हड्डियों की मजबूती और विकास में कैल्शियम और भास्वर (फास्फोरस) की जरूरत होती है। शरीर को जब रक्त में कैलशियम और फास्फोरस की कमी का आभास होता है तो वह हड्डियों से इसे लेकर अपना संतुलन बनाता है। इससे हड्डियाँ नरम पड़ जाती है और इनकी संरचना कमजोर हो जाती है।

चिकित्सा

यदि विटामिन डी या कैल्शियम की कमी से सूखा रोग होता है तो आहार द्वारा इसकी पूर्ति करने पर ठीक हो जाता है और बच्चों की हड्डियों की समस्या से बचा जा सकता है।

आनुवंशिक कारणों से होने पर अतिरिक्त दवाओं और विशेषज्ञ की जरूरत होती है। कुछेक कंकाल रोगों में शल्यचिकित्सा की जरूरत पड़ती है।

बाहरी कड़ियाँ

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