प्रेषण इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शन

प्रेषण इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शन (अंग्रेजी:Transmission electron microscopy) (TEM) एक सूक्ष्मदर्शन (माइक्रोस्कोपी) तकनीक है, जिसमे इलेक्ट्रॉनों का एक किरणपुंज, एक बहुत महीन (पतले) नमूने से होकर गुजरती है और इस प्रक्रिया के दौरान किरणपुंज के इलेक्ट्रॉन नमूने के साथ संपर्क स्थापित कर एक छवि का निर्माण करते है, जिसे एक इमेजिंग उपकरण जैसे एक प्रतिदीप्तिशील (फ्लोरोसेंट) पर्दे (स्क्रीन) या एक फोटोग्राफिक फिल्म पर आवर्धित और केंद्रित (फोकस) किया जाता है। एक सीसीडी कैमरे के संवेदक भी इसका संसूचन कर छवि निर्माण करते हैं। सबसे पहला TEM मैक्स नॉल और अर्नस्ट रुस्का ने 1931 में बनाया था, 1933 मे इन दोनो मे मिल कर एक TEM विकसित किया जिसकी रिज़ोल्विंग पावर प्रकाश से भी अधिक थी। पहला व्यावसायिक TEM 1939 में बाज़ार मे आया।

पोलियो विषाणु की एक TEM छवि. पोलियो विषाणु का आकार 30 से 230 nm के बीच होता है।[1]

टीइएम प्रकाश सूक्ष्मदर्शी की तुलना मे काफी उच्च रिजोल्यूशन की छविओं का निर्माण करने मे सक्षम होते हैं, जिसका कारण इलेक्ट्रॉनों की लघु दे ब्रोग्ली तरंग दैर्ध्य है। इसका यह गुण इस उपकरण को अति सूक्ष्मविभेदन करने मे सक्षम बनाता है, यहाँ तक कि यह परमाणुओं के एकल स्तंभ की भी गहन जांच सकता है, जो एक प्रकाश सूक्ष्मदर्शी द्वारा विभेदित सबसे छोटी वस्तु से भी हजारों गुना कम होता है। भौतिक और जीव दोनो वैज्ञानिक क्षेत्रों मे टीइएम एक प्रमुख विश्लेषण विधि की भूमिका निभाते हैं, जिसमे कैंसर अनुसंधान, पदार्थ विज्ञान, वाइरोलोजी, प्रदूषण और अर्धचालक अनुसंधान, जैसे क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं।

कम आवर्धन पर TEM छवि का कनट्रास्ट, पदार्थ में इलेक्ट्रॉनों के अवशोषण, पदार्थ की मोटाई और संरचना के कारण होता है। उच्च आवर्धन पर जटिल तरंग संपर्क (complex wave interactions), छवि की तीव्रता का नियमन (मॉडुलेट) करते हैं, प्रेक्षक छवियों के विशेषज्ञ विश्लेषण की आवश्यकता होती है।

सन्दर्भ

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