नाभिकीय चिकित्सा

नाभिकीय चिकित्सा (अंग्रेज़ी:न्यूक्लियर मेडिसिन) एक प्रकार की चिकित्सकीय जाँच तकनीक होती है। इसमें रोग चाहे आरंभिक अवस्था में हों या गंभीर अवस्था में, उनकी गहन जाँच और उपचार संभव है।[2] कोशिका की संरचना और जैविक रचना में हो रहे परिवर्तनों पर आधारित इस तकनीक से चिकित्सा की जाती है। इस पद्धति को न्यूक्लियर मेडिसिन भी कहा जाता है। वर्तमान प्रचलित चिकित्सा पद्धति में रोगों का मात्र अंदाजा या अनुमान ही लगाते हैं और उपचार करते हैं, जबकि नाभिकीय चिकित्सा में न केवल रोग को बहुत आरंभिक अवस्था में पकड़ा जाता है, वरन यह प्रभावशाली ईलाज और दवाइयों के बारे में भी स्पष्टता से बहुत कुछ बता पाने में सक्षम है। इससे किसी भी बीमारी की विस्तृत जानकारी, उसके प्रभाव और उसके उपचार निपटने के प्रभावशाली उपायों आदि के बारे में पता चलता है। इतना ही नहीं, इससे बीमारी के आगे बढ़ने के बारे में यानी भविष्य में इसके फैलने की गति, दिशा और तरीके का भी ज्ञान हो जाता है।[3]

सामान्य पूर्ण शरीर स्कैन, कैंसर[1] आदि में उपयोगी

यह तकनीक सुरक्षित, कम खर्चीली और दर्द रहित चिकित्सा तकनीक है।[4] सामान्यतः किसी प्रकार का रोग होने के बाद ही सी. टी. स्कैन, एम.आर.आई और एक्स-रे आदि से परीक्षण करने से प्रभावित अंगो की स्थिति का पता चल पाता है। इस पद्धति में रोगी को एक रेडियोधर्मी समस्थानिक को दवाई के रूप में इंजेक्शन के रास्ते शरीर में दिया जाता है। फिर उसके रास्ते को स्कैनिंग के जरिये देख्कर पता लगाय़ा जाता है, कि शरीर के किस भाग में कौन सा रोग हो रहा है।[2] इसके साथ ही इनकी स्कैनिंग के कुछ दुष्प्रभाव (साइड इफैक्ट) की भी संभावना होती है।

हाइपरथायरॉएडिज़्म आकलन हेतु आयोडीन-१२३ स्कैन

नाभिकीय चिकित्सा में रोगी के शरीर में इंजेक्शन द्वारा बहुत ही कम मात्रा में रेडियोधर्मी तत्व प्रविष्ट करा दिये जाते हैं, जिसे शरीर में संक्रमित या प्रभावित कोशिका इसे अवशोषित कर लेती है। इससे होने वाले विकिरण को एक विशेष प्रकार के गामा कैमरे में उतार कर रोग की सटीक और विस्तृत जाँच की जाती है।[4] न्यूक्लियर मेडिसिन स्कैनिंग से मिले अलग फिल्म में प्रभावित अंग की विस्तृत जानकारी मिलती है। नाभिकीय चिकित्सा तकनीक में रेडियो धर्मी तत्व का प्रयोग इतनी कम मात्र में किया जाता है कि इससे होने वाले विकिरण का प्रभाव कोशिकाओं पर नहीं पड़ता है।

नाभिकीय चिकित्सा द्वारा कैंसर[1][5], हृदय, मस्तिष्क, फेफड़ा, थायरॉइड अपटेक स्कैन और बोन स्कैन किए जाते हैं। इसके अलावा अन्य रोगों का ईलाज भी नाभिकीय चिकित्सा द्वारा किया जाता है।[2] अवटु ग्रंथि में आई खराबी और हड्डी में लगातार हो रहे दर्द का इलाज इसी तकनीक से होता है।

शिक्षण संस्थान

भारत में इसकी शिक्षा उपलब्ध कराने वाले संस्थानों में से कुछ प्रधान हैं:-

  • अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली, वेबसाइट -
  • वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली, वेबसाइट -
  • किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज, लखनऊ, वेबसाइट -
  • संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, चंडीगढ़, वेबसाइट -
  • कस्तूरबा गांधी मेडिकल कॉलेज, मणिपाल, वेबसाइट -

सन्दर्भ

  1. कैंसर के खिलाफ जंग में नई मशीन कारगर(हिन्दी)।नवभारत टाइम्स।२१ दिसंबर, २००७।लखनऊ
  2. हर बीमारी में कारगर है न्यूक्लियर मेडिसिन। याहू जागरण।१४ मई, २००८
  3. सही जाँच और सटीक कॅरिअर के लिए न्यूक्लियर मेडिसिन(हिन्दी)। हिन्दी मिलाप।६ अप्रैल, २००८
  4. गामा स्कैनिंग से उम्दा जांच(हिन्दी)। याहू जागरण।१२ मार्च, २००८। डॉ॰मुकेश जैन:डी.एन.बी, न्यूक्लियर मेडिसिन)
  5. नाभिकीय औषधि चिकित्सा का विकास जरूरी।]। छत्तीसगढ़ न्यूज़।(हिन्दी)

बाहरी कड़ियाँ

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