टेफ्लान

टेफ्लान या पॉलीटेट्राफ्लूरोएथिलीन (Polytetrafluoroethylene (PTFE)) एक संश्लेषित फ्लूरोबहुलक है। यह अनेकों कार्यों के लिये उपयोगी है। 'टेफ्लोन' (Teflon) डूपॉण्ट (DuPont Co) द्वारा विकसित पीटीएफई का ब्राण्ड-नाम है।

टेफ्लॉन की पट्टी, फीता(टेप) आदि
टेफ्लान का अणु
टेफ्लॉन की परत चढ़ाया हुआ बरतन (पैन)

पीटीएफई बहुत ही कठोर पदार्थ है। इस पर ऊष्मा, अम्ल तथा क्षार का प्रभान नहीं पड़ता है। यह विद्युत धारा का कुचालक है।

कार्बन के रासायनिक यौगिकों को कार्बनिक यौगिक कहते हैं। प्रकृति में इनकी संख्या 10 लाख से भी अधिक है। जीवन पद्धति में कार्बनिक यौगिकों की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है। इनमें कार्बन के साथ-साथ हाइड्रोजन भी रहता है। ऐतिहासिक तथा परंपरा गत कारणों से कुछ कार्बन के यौगकों को कार्बनिक यौगिकों की श्रेणी में नहीं रखा जाता है। इनमें कार्बनडाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड प्रमुख हैं। सभी जैव अणु जैसे कार्बोहाइड्रेट, अमीनो अम्ल, प्रोटीन, आरएनए तथा डीएनए कार्बनिक यौगिक ही हैं। कार्बन और हाइड्रोजन के यौगिको को हाइड्रोकार्बन कहते हैं। मेथेन (CH4) सबसे छोटे अणुसूत्र का हाइड्रोकार्बन है। ईथेन (C2H6), प्रोपेन (C3H8) आदि इसके बाद आते हैं, जिनमें क्रमश: एक एक कार्बन जुड़ता जाता है। हाइड्रोकार्बन तीन श्रेणियों में विभाजित किए जा सकते हैं: ईथेन श्रेणी, एथिलीन श्रेणी और ऐसीटिलीन श्रेणी। ईथेन श्रेणी के हाइड्रोकार्बन संतृप्त हैं, अर्थात्‌ इनमें हाइड्रोजन की मात्रा और बढ़ाई नहीं जा सकती। एथिलीन में दो कार्बनों के बीच में एक द्विबंध (=) है, ऐसीटिलीन में त्रिगुण बंध (º) वाले यौगिक अस्थायी हैं। ये आसानी से ऑक्सीकृत एवं हैलोजनीकृत हो सकते हैं। हाइड्रोकार्बनों के बहुत से व्युत्पन्न तैयार किए जा सकते हैं, जिनके विविध उपयोग हैं। ऐसे व्युत्पन्न क्लोराइड, ब्रोमाइड, आयोडाइड, ऐल्कोहाल, सोडियम ऐल्कॉक्साइड, ऐमिन, मरकैप्टन, नाइट्रेट, नाइट्राइट, नाइट्राइट, हाइड्रोजन फास्फेट तथा हाइड्रोजन सल्फेट हैं। असतृप्त हाइड्रोकार्बन अधिक सक्रिय होता है और अनेक अभिकारकों से संयुक्त हा सरलता से व्युत्पन्न बनाता है। ऐसे अनेक व्युत्पंन औद्योगिक दृष्टि से बड़े महत्व के सिद्ध हुए हैं। इनसे अनेक बहुमूल्य विलायक, प्लास्टिक, कृमिनाशक ओषधियाँ आदि प्राप्त हुई हैं। हाइड्रोकार्बनों के ऑक्सीकरण से ऐल्कोहॉल ईथर, कीटोन, ऐल्डीहाइड, वसा अम्ल, एस्टर आदि प्राप्त होते हैं। ऐल्कोहॉल प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक हो सकते हैं। इनके एस्टर द्रव सुगंधित होते हैं। अनेक सुगंधित द्रव्य इनसे तैयार किए जा सकते हैं। इसी प्रकार टेफ्लान को भी विभिन्न प्रयोगों में लिया जा सकता है।

टेफ्लान की उपयोगिता :

   टेफ्लान

हम सभी जानते हैं कि आजकल दो पहिया और चौपहिया वाहनों के पेन्ट की सुरक्षा के लिए टेफ्लान कोटिंग की जाती है, ताकि पेन्ट को स्क्रैच न लगे।

                                            इसी टेफ्लान से संबन्धित एक बेहतरीन सिद्धांत मेरे रसायनशास्त्र व्याख्याता श्री निगम ने दिया था। यह सत्रह वर्ष पहले की बात है। तब मै स्कूल मे था।

                                            टेफ्लान का रासायनिक नाम पॅाली टेट्रा फ्लु ओरो एथिलीन है। यह एक कठोर धातु की श्रेणी मे है। टेफ्लान का गुण कठोर और अत्यधिक चिकना होता है। टेफ्लान न गलता है और न सड़ता है। जलाए जाने पर भी कुछ न कुछ अवशेष बचता है।

श्री निगम ने बताया था कि किसी भी गाड़ी के इंजन ब्लाक मे टेफ्लान निर्मित पिस्टन का इस्तेमाल किया जाए तो इंजन की कार्यक्षमता बढ़ जाएगी। क्योंकि टेफ्लान सख्त और बहुत ज़्यादा 

चिकनी धातु है। इंजन का पिस्टन न के बराबर घिसेगा और पिकअप और फ्यूल एवरेज कई सालों तक शानदार रहेगा।

हम जानते हैं कि जब प्लास्टिक का अविष्कार हुआ था पूरी दुनिया बदल गई थी। इसी तरह टेफ्लान के नए नए उपयोग से पूरी दुनिया मे एक नई क्रांति आ सकती है।

श्री निगम ने यह भी कहा था कि निकट भविष्य मे टेफ्लान निर्मित हवाई जहाज बनाए जा सकते हैं जो क्रैश नही हुआ करेंगे बल्कि पतंग की तरह उड़ते हुए धीरे-धीरे जमीन पर उतर जाएंगे।

लेखक :

हसीब उल नवाज़

सम्बलपुर, कांकेर, छत्तीसगढ़, भारत

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