कोमल ऊतक चोट

कोमल ऊतक चोट मतलब पूरे शरीर की कोई भी मांसपेशियों, बंधन और कण्डरा में क्षति होना। आम कोमल ऊतक चोटे मोच, दबाव, नील या शरीर के किसी खास हिस्से के अति प्रयोग करने से हो सकती है। कोमल ऊतक चोट के करण दर्द, सूजन, नील और कार्य न करने की समता हो जाती है शरीर को।

नील एक कोमल ऊतक चोट का उदारन्ह्र्ण है

हीलिंग चरण

  • भड़काऊ प्रतिक्रिया चरण - शुरू में चोट लगने के समय से ४ दिनों के बाद तक।
  • फाइबरोब्लास्टिक मरम्मत चरण - भड़काऊ प्रतिक्रिया चरण अतिव्यापी, आम तौर पर 4 दिनों के बाद चोट से शुरू होता है और अप करने के लिए 6 सप्ताह के लिए जारी रहता है।
  • परिपक्वता-फिर से बनाना चरण - ६ सप्ताह के चोट के बाद आसपास शुरू होता है और २-३ साल के तक रहता है।

आमतौर पर घायल ऊतक

  • अस्थि-बंधन
  • मांसपेशिया
  • कण्डरा
  • नसे
  • हड्डिया
  • उपास्थि

इलाज

पूर्ण निदान करने लिए इन उपकरणों का इस्तेमाल कर सकते हैं:

  • तंत्रिका चालन अध्ययन तंत्रिका रोग स्थानीयकरण करने के लिए इस्तेमाल किया जा जाता है।
  • विद्युत-निदान भी मायोपथी और न्यूरोपैथी के बीच अंतर में मदद करता है।
  • चुम्बकीय अनुनाद इमेजिंग

सन्दर्भ

Flegel, M.J. (2004)। Sport first aid: A coach’s guide to preventing and responding to injuries. Hong Kong, Japan: Human Kinetics.

Lindsay, R., Watson, G., Hickmont, D., Broadfoot, A., & Bruynel, L. (1994)। Treat your own strains sprains and bruises. New Zealand: Spinal Publications.

Lovering, R.M. (2008)। Physical therapy and related interventions. In P.M. Tiidus (Eds.), Skeletal muscle damage and repair (pp. 219–230)। United States of America: Human Kinetics.

Prentice, William E. "Tissue Response to Injury." Principles of Athletic Training: A Competency Based Approach. 14th ed. New York: McGraw Hill Companies, 2011. 260-277. Print.

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