केशिकास्तवक

एक केशिकास्तवक एक केशिका गुच्छा है जो रक्त को छानने के लिए मूत्र के रूप में पहला कदम उठाता है।

Glomerulus
Glomerulus.
Distribution of bloodvessels in cortex of kidney.
लैटिन glomerulus renis
ग्रे की शरी‍रिकी subject #253 1221
पूर्वगामी Metanephric blastema
एमईएसएच {{{MeshNameHindi}}}

यह हड्डीवाला गुर्दे की नेफ्रोन में बोमन कैप्सूल से घिरा हुआ है।

यह अपने गुर्दे परिसंचरण के एक अभिवाही धमनिका से रक्त की आपूर्ति प्राप्त करता है। 
अधिकांश अन्य केशिका बिस्तर के विपरीत, वेन्यूल में ड्रेन होने की बजाए केशिकास्तवक एक अपवाही धमनिका में ड्रेन होती है।
धमिनिकाओ के प्रतिरोध के परिणाम, केशिकास्तवक में उच्च दबाव बन जाता है, इससे  अल्ट्राफ़िल्ट्रेशन की प्रक्रिया में सहायता मिलती है जिससे रक्त के घुलनशील और तरल पदार्थ मजबूर हो कर के कोशिकाओ से बाहर निकल के बोव्मनस कैप्सूल में जाते है।

एक केशिकास्तवक और उसके आसपास के बोमन कैप्सूल मिलकर एक वृक्क कणिका (गुर्दे का 'मूल' निस्यंद इकाई) का गठन करते हैं। दर, जिस पर खून सभी केशिकागुच्छीय के माध्यम से फ़िल्टर होता है और जिससे कुल गुर्दे समारोह का माप होता है, उसे गलोमेरुलर निस्पंदन दर (G F R) कहते हैं।

अभिवाही संचलन

अभिवाही धमिनिका प्रांतस्था के अन्दर की इंतेर्लोबुलर धमनी की एक शाखा है जो गलोमेरुलस की आपूर्ति करता है।

परतें

यदि कोई पदार्थ अन्त:स्तर सम्बन्धी कोशिकाओं, ग्लोमेरुलर के तहखाने की झिल्ली और पादकोशिका में से पास हो सकता है, तो यह अल्टाफिल्त्रेट के रूप में जाना जाता है और यह छोटी प्रॉक्सिमल नाली के अवकाशिका में प्रवेश करती है। अन्यथा, यह अपवाही संचलन के माध्यम से वापसी करता है। जैसे की नीचे चर्चा की गई है।

गुर्दे के अन्दर निस्यंदन परिधि (रक्त मूत्र) की योजना १- केशिकास्तवक के एन्दोथेलिअल कोशिकाओं ; क-. (रोमकूप गवाक्ष). २- केशिकास्तवक के तहखाने की झिल्ली: क. पटल रारा बिरली, ख. पटल बिरली, ग. पटल देंसा, 1.एन्ज्य्माटिक और संरचनात्मक प्रोटीन, २. निस्पंदन भट्ठा, ३. डायाफ्राम

एन्दोथिलिअल कोशिकाओं

केशिकास्तवक की एन्दोथिलिअल कोशिकाओं में शामिल कई पोर्स (गवाक्षीकरण) है पर अन्य गवाक्षीकरक कोशिकाओ के विपरीत, वह मध्यपट के दुआरा फैला हुआ नहीं है।

कोशिकाओं के द्वार इतने बड़े है कि कुछ भी जो लाल रक्त कोशिका से छोटा है वो कोशिका के माध्यम से गुज़र जाता है।

इस वजह से, ग्लोमेरुलस के अस्तर एन्दोथिलिअल कोशिकाओं को आमतौर पर गुर्दे निस्पंदन बाधा का हिस्सा माना नहीं हैं।

ग्लोमेरुलर तहखाने झिल्ली

ग्लोमेरुलर एन्दोथिलियम एक बहुत ही मोटे (250-350 एनएम)(250 -350 nm) ग्लोमेरुलर तहखाने की झिल्ली पर बैठता है। अन्य तहखानो की झिल्लियो (40-60 nm) की तुलना में यह न केवल अप्रत्याशित मोटी है पर यह नकारात्मक चार्ज (ग्लिकोस्मिन्गोग्लिकंस) जैसे हेपारन सल्फेट में धनि है।

नकारात्मक चार्ज वाली तहखाने की झिल्ली, रक्त में नकारात्मक-चार्ज वाले प्रोटीन को पीछे हटाता है, इससे वोह बोमन की जगह में अपने मार्ग को रोकने में मदद करता है

पादकोशिकाएं

पाद्कोशिका केशिकागुच्छीय तहखाने की झिल्ली के दूसरी तरफ धारी बनाते है और बोव्मंस स्पेस के अस्तर का भाग बनाते हैं। पाद्कोशिका फुट प्रक्रियाओ (वृंत) का एक तंग इंटरदिगितातिंग (interdigitating) नेटवर्क बनता है, जो प्रोटीन के निस्यंदन को केशिका के अवकाशिका से लेकर बोव्मन'स स्पेस तक संभालता है।

आसपास की पाद्कोशिका पैर प्रक्रियाओं के बीच की जगह एक फैला हुआ भट्ठेदार मध्यपट है, जो कई प्रोटीन्स से बना होता है जिसमे पोदोसिन और नेफ्रिन भी शामिल होते हैं। इसके अलावा पैर प्रक्रियाओ के पास नकारात्मक चार्ज वाले कोट -शर्करा पुटक भी होते है जो सीरम अन्नसार जैसे नकारात्मक चार्ज वाले अणु के निस्यंदन पर सीमा लगा देते हैं।

पादोसाइट्स को ग्लोमेरुलस का एक भाग समझने के बजआए उनको कभी कबार रहे हैं बोव्मनस काप्सुले की आंत संबंधी परत समझा जाता है।

इंटरग्लोमेरुलर मेसानजिअल कोशिका

इंटरग्लोमेरुलर मेसानजिअल कोशिकाए केशिकास्तवक के एनडोथीलिअल कोशिकाओ के बीच के अन्तराल में पे जाते हैं। वह निस्यंद परिधि का हिस्सा नहीं है लेकिन वे विशेष पेरीसाईंटस है जो परोक्ष रूप से निस्यंदन की क्रिया में भाग लेते हैं। वह निस्यंदन जो ग्लोमेरुलर की सतह के क्षेत्रफल को और निस्यंदन दर को संकूच और कम करने से किया जाता है यह सब मुख्य रूप से खिंचाव को प्रतिक्रिया देने के लिए होता है।

चयनात्मकता

परतों के ढांचे उनकी पारगम्यता, चयनात्मकता पेर्म्स्लेक्टिविटी से निर्धारित किये जाते हैं। तहखाने की झिल्ली का नकारात्मक चार्ज और पोदोसाईटिक उपकला और केशिकागुच्छीय की दीवार (8 nm) से प्रभावी पोर का आकार ही वह कारण है जो पर्मस्लेकटीवीटी को प्रभावित करते हैं। एक परिणाम के रूप में एक बड़ी और / या नकारात्मक चार्ज वाले अणु सकारत्मक चार्ज वाले अणुओ से अक्सर कम दूरी से पास हो जातें है।[1] उदाहरण के रूप में छोटे आयनों जैसे सोडियम और पोटेशियम आयन आसानी से पास हो जाएंगे, पर वासतव में बड़े प्रोटीन्स, जैसे हीमोग्लोबिन और अन्नसार की भेद्यता है ही नहीं।

अपवाही संचलन

केशिकास्तवक का खून एक वेंन्यूल से बाहर निकलने की बजाए एक अपवाही धमिनिका से बहार निकलता है। जैसे की अधिकांश अन्य केशिका प्रणालिओ के अन्दर उसका निरीक्षण किया जाता है। इससे केशिकास्तवक में रक्त के प्रवाह पर अछा नियंत्रण मिलता है, धमिनिकाए वेंयुल्स से ज्यादा आसानी से फैलाई और संकीर्ण की जा सकती है जो धमिनिकाओ के कारण बड़ी और चिकनी मांसपेशी की परत होती है। (आवरक झिल्ली की मीडिया)

जुक्स्तअमेडयुलरी नेफ्रॉन की अपवाही धमनिकाए (जो मज्जा के निकटतम नेफ्रोंस की १५ % होती है) सीधी केशिकाऔ की शाखाओं को भेजती है जो रीनल मज्जा को समतानिक रक्त का उद्धार करती है। हेन्ले की पाश के साथ साथ, यह वासा रेकता - नेफ्रॉन की प्रतिधारा का विनिमय करने वाली प्रणाली की स्थापना करवाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

वह अपवाही धमनिका जिसमें केशिकास्तवक रक्त को प्रसव करता है, वह  इंटरलोब्यूलर नस में जाके खली हो जाती है।

स्तवकासन्न कोशिकाए

अभिवाही धमनिका की दीवारों में विशेष चिकनी मांसपेशियों की कोशिकाए शामिल होती जो रेनिन को संश्‍लेषण द्वारा बनाती है। . यह स्तवकासन्न कोशिकाए रेनिन-एंजियोटेनसिन प्रणाली में मुख्य भूमिका निभाता है, जो रक्त की मात्रा और दबाव को विनियमित करने में मदद करता है।

अतिरिक्त छवियां

सन्दर्भ

  1. Guyton, Arthur C.; Hall, John E. (2006). Textbook of Medical Physiology. Philadelphia: Elsevier Saunders. पृ॰ 316–317. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-7216-0240-1.

बाहरी कड़ियाँ

साँचा:Kidney

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